26 january abvp Administrative Alirajpur b4 cinema balaji dhaam bjp cinema hall jhabua city crime cultural education election events Exclusive Famous Place gopal mandir jhabua Health and Medical jhabua jhabua crime Jhabua History matangi Movie Review MPPSC MPRLM National Body Building Championship India photo gallery politics ram sharnam jhabua religious religious place Road Accident sd academy shailesh dubey social sports tourist place Video Visiting Place अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अंगूरी बनी अंगारा अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस अपराध अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस अल्प विराम कार्यक्रम अवैध शराब आईसेक्ट आजाद आतंकवाद विरोधी दिवस आतिशबाजी आदित्य पंचोली आदिवासी विकास विभाग आरटीओं आवंला नवमी आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट ई-उपार्जन साफ्टवेयर ई-टेण्डर उत्कृष्ट विद्यालय उत्कृष्ट सड़क उद्यमिता उद्यानिकी सेमीनार उर्स ऋषभदेव बावन जिनालय एक पहल एक पहल संस्था एम.पी. मोबाइल एमपी पीएससी कलावती भूरिया कलेक्टर कांग्रेस कांतिलाल भूरिया कार्तिक पूर्णिमा कार्यशाला कालिका माता मंदिर किसान सम्मेलन कृषि कृषि महोत्सव कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ कैथोलिक डायसिस कौशल विकास केंद्र क्रिकेट टूर्नामेंट खबरे अब तक खेडापति हनुमान मंदिर खेल गणगौर पर्व गल पर्व गायत्री शक्तिपीठ गुडिया कला झाबुआ गुडी पड़वा गेल गोकुल महोत्सव गोपाल मंदिर झाबुआ गोपाष्टमी ग्राम पंचायत ग्राम सभा घटनाए चन्द्रशेखर आजाद जनसुनवाई जय आदिवासी युवा संगठन जय बजरंग व्यायाम शाला जयस जिला चिकित्सालय जिला चेस एसोसिएशन जिला जेल जिला पेंशनर एसोसिएशन जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ जेईई जैन मुनि जैन सोश्यल गुुप झकनावदा झाबुआ झाबुआ इतिहास झाबुआ का राजा झाबुआ पर्व झाबुआ राजवाड़ा झूलेलालजी जन्मोत्सव टीबी तहसीलदार तुलसी विवाह थांदला दशहरा दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि दीपावली देवझिरी धनसिंह बारिया धार्मिक धार्मिक स्थल नगरपालिका परिषद झाबुआ नर्मदा सेवा उपयात्रा नवरात्री नवरात्री चल समारोह निर्वाचन आयोग निलंबन नेत्र शिविर पटाखा लायसेंस परख वीडियो कान्फ्रेंस परिवहन विभाग पर्यटन पर्व पर्यटन स्थल पल्स पोलियो अभियान पारा पेटलावद प्याउ प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रतिभा पर्व प्रतियोगी परीक्षा प्रधानमंत्री आवास योजना प्रभारी मंत्री प्रशासनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस बाल कल्याण समिति बाल विवाह बोहरा समाज ब्लू व्हेल गेम भगत सिंह भगौरिया पर्व भर्ती भाजपा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान भारतीय जैन संगठना भावांतर योजना म.प्र. राज्य कौशल विकास मिशन मध्यप्रदेश टूरिज्म मध्यप्रदेश पटवारी संघ मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन मध्यप्रदेश सडक विकास निगम मप्र डिप्लोमा इंजिनियर्स एसोसिएशन मल्टीप्लेक्स सिनेमा महाशिवरात्रि महिला एवं बाल विकास विभाग मिल बॉचे मध्यप्रदेश मिशन इन्द्रधनुष मुख्यमंत्री उघमि योजना मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान मुस्लिम समाज मुहर्रम मूवी रिव्यु मेघनगर मोड़ ब्राह्मण समाज मोहनखेड़ा रक्तदान रक्तदान शिविर रंगपंचमी रंगपुरा राजगढ़ राजनेतिक राजवाडा चौक राजस्व निरीक्षक संघ राणापुर रानापुर रामनवमी रामशंकर चंचल रामा रायपुरिया राष्ट्रीय एकता दिवस राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण रोजगार मेला रोटरी क्लब लाडली शिक्षा पर्व लेबर बजट लोक कल्याण शिविर वरदान नर्सिंग होम वाटसएप विधायक विधायक शांतिलाल बिलवाल विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस विश्व क्षय दिवस विश्व हिन्दू परिषद विश्वकर्मा जयंती वेलेंटाईन डे शरद पूर्णिमा शासकीय महाविद्यालय झाबुआ शिक्षा शिल्पी बोर्ड शौर्यादल सकल व्यापारी संघ संकल्प ग्रुप संत रविदास जयंती सत्यसाई सेवा समिति संपादकीय सरस्वती शिशु मंदिर सहायक आयुक्त साई मंदिर झाबुआ साक्षर भारत अभियान साज रंग झाबुआ सामाजिक सामूहिक विवाह सावित्रीबाई फुले पुण्यतिथि सांस्कृतिक सेन समाज सौभाग्य पंचमी स्टेट बैंक स्थापना दिवस स्वच्छ भारत मिशन स्वास्थ्य विभाग हज हजरत दीदार शाह वली हनुमान टेकरी हाथीपावा हिन्दू नववर्ष होली झाबुआ

जनजातियों की सांस्‍कृतिक रूप से अपनी अलग एक पहचान है। प्राचीन संस्‍‍कृति एवं सभ्‍यता से प्राप्‍त अवशेषों से भी प्रकृति के प्रति आस्‍था और विश्‍वास के रूप में प्रकृति की उपासना के उदाहरण मिलते हैं। सूर्य, चन्‍द्रमा, पेड़-पौधे, जल, वायु, अग्नि,की पूजा का अस्तित्‍व मिश्र, मेसोपोटामिया, मोहन-जोदाड़ो, हडप्‍पा आदि की संस्‍कृति में समान रूप से मिलता है। जिसका स्‍पष्‍ट संकेत है‍ कि प्राचीन मानव की आराध्‍य संस्‍कृति का मूल प्रकृति पूजा रहा है। वर्तमान में भी प्रत्‍येक संस्‍कृति में प्रकृति पूजा का अस्तित्‍व है इसके अतिरिक्‍त हम यह देखते हैं कि आदिवासीयों का जीवन एक सम्‍पूर्ण इकाई के रूप में विकसित है आदिवासी जीवन और कला की आपूर्ति अपने द्वारा उत्‍पादित उन समस्‍त सामग्रियों से करते हैं जो उन्‍हें प्रकृति ने सहज रूप से प्रदान की है। भौगोलिक रूप से जो उन्‍हें प्राप्‍त हो गया उसी में वे अपने जीवन का चरम तलाशते हैं, उसी में ही उनके सामाजिक, आर्थिक, गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabuaगुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua आध्‍यात्मिक अवधारणाओं की पूर्ति होती है। जनजातियों का आध्‍यात्मिक जीवन कठिन मिथकों से जुड़ा होता है जो प्रथम दृष्‍टया देखने में तो सहज और अनगढ़ दिखता है किन्‍तु उसकी गहराई में जो अर्थ और आशय होते हैं वो जनजातीय समूहों के जीवन संचालन में समर्थ और मर्यादित होती है। आदिवासी जीवन प्रकृति पर आश्रित होता है इसलिये प्रकृति से उसके प्रगाढ़ रिश्‍ता होते हैं। आदिवासी जीवन संस्‍कृति में जन्‍म से लेकर मृत्‍यु तक के संस्‍कारों में किसी न किसी रूप में प्रकृति को अहमियत दी जाती है।-। प्रागैतिहासिक काल से लेकर आज तक उपलब्‍ध पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर अनेक बुद्धिजीवियों, दार्शनिकों ने कला विकास में आस्‍था, अनुष्‍ठान एवं अभिव्‍यक्ति को प्रमुख बिन्‍दु के रूप में व्‍याख्‍या दी है। लोक कला का मूल मंगल पर आधारित है यह सर्वमान्‍य सत्‍य है। मंगल भावना से ही अनेक शिल्‍पों, चित्रों इत्‍यादि का निर्माण लोक कला संसार में होता आया है। जिसमें अभिप्रायों, प्रतीकों का भी विशेष महत्‍व है।
                              गुड़िया कला के निर्माण समय के संदर्भ में अनेक भ्रांतियां है। इसके प्रारंभ संबंधी भ्रांतियों में एक यह भी है कि सर्वप्रथम आदिवासियों ने अपने तात्‍कालिक राजा को उपहार स्‍वरूप शतरंज भेट किया था जिसमें शतरंज के मोहरों को तात्‍कालिक परिवेश में उपलब्‍ध संसाधनों द्वारा आकार दिया जा कर अनुपम कलाकृति का रूप दिया गया यथा शतरंज के मोहरों जैसे राजा, वजीर, घोड़ा, हाथी, प्‍यादे इत्‍यादि को कपड़े की बातियां लपेट लपेट कर बनाया गया था। और तभी से इसे रोजगार के रूप में अपनाये जाने पर बल दिया जाकर गुड़िया निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई। और आदिवासी स्‍त्री पुरूषों को इसका प्रशिक्षण दिये जाने की शुरूवात की गई। आज गुड़िया का जो स्‍वरूप है वह गिदवानी जी का प्रयोग है प्रारंभिक स्‍वरूप में वेशभूषा तो वही थी जो आदिवासियों का पारं‍परिक वेशभूषा चला आ रहा है। केवल तकनीक और आकार में परिवर्तन हुआ है। जैसा कि हम सभी इस बात से परिचित है कि न केवल ग्रामीणो में बल्कि आप हम सभी का बचपना  नानी दादी द्वारा निर्मित कपड़े की गुड़िया से खेल कर गुजरा है। कपड़े की गुड़िया तब से प्रचलन में है लेकिन झाबुआ में इसका व्‍यवसायिक प्रयोग हुआ। जब आदिवासी हस्‍तशिल्‍प से संबंधित विशेषज्ञों से इस बारे में चर्चा की गई तो निष्‍कर्ष यही निकला कि प्रारंभ में गुड़िया अनुपयोगी कपड़े की बातियों को लपेटकर ही गुड़िया निर्माण किया जाता था लेकिन व्‍यावसायिक स्‍वरूपों के कारण ही अब स्‍टफ़ड डाल के रूप में सामने आया है। इस प्रविधि से आसानी से गुड़ियों की कई प्रतियां आसानी से कम परिश्रम, कम समय में तैयार की जा सकती। एवं कम प्रशिक्षित शिल्पियों द्वारा भी यह कार्य आसानी से करवाया जा कर शिल्‍प निर्माण किया जा सके।
      गुड़ियाकला के वरिष्‍ठ शिल्‍पी श्री उद्धव गिदवानी जी के अनुसार भी आदिवासियों को प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु 1952-53 में शासन ने पहल की तब से आज तक यह परम्‍परा निरंतर चली आ रही है। जिसका उद्देश्‍य आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को सृजित करना, रोजगार प्रदान करना, व्‍यवहारिक शिक्षा को प्राथमिकता देना, एवं आदिवासी सामाजिक, सांस्‍कृतिक एवं धार्मिक पहलुओं को शामिल करना इत्‍यादि रहा है। 

गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
  (स्‍टफ्ड डाल)  
गुड़ियाकला के प्रकार
गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
  (रेग डाल)

                                                

       गुड़िया निर्माण प्रविधि के अनुसार गुड़िया दो प्रकार की बनाई जाती है। रेग डॉल एवं स्‍टॅफ्ड डॉल। झाबुआ क्षेत्र में मुख्‍यत: स्‍टफ्ड डॉल का निर्माण किया जाता है। जिसमें आदिवासी भील-भिलाला युगल, आदिवासी ड्रम बजाता युवक, जंगल से लकड़ी अथवा टोकरी में सामान लाती आदिवासी युवती इत्‍यादि प्रमुखता से बनाया जाता है। प्रारंभ में गुड़िया लगभग आठ से बारह इंच तक की बनाई जाती थी लेकिन वर्तमान समय में दस से बारह फुट तक की गुड़िया बनाई जाने लगी है। अब गुड़िया निर्माण केवल अलंकरणात्‍मक नहीं रह गई बल्कि चिकित्‍सा शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। जहां कपड़े से निर्मित जीवन्‍त मॉडलों का निर्माण किया जा कर शिक्षा में रचनात्‍मक प्रयोग किये जा रहें है। इसके अतिरिक्‍त विवरणात्‍मक गुड़िया समूह का निर्माण भी किया जा रहा है जिसमें आदिवासी जीवन की सहज घटनाओं जैसे मुर्गा लड़ाई, सामाजिक दिनचर्या, नृत्‍य, महापुरूषों की जीवन में घटित घटनाओं, सैन्‍य प्रशिक्षण, इत्‍यादि प्रमुख हैं।
गुड़ियाकला निर्माण प्रविधियां
गुड़िया शिल्‍प प्रकृति प्रदत्‍त हाथों की वह प्रतिभा है जिसमें शिल्‍पी अपनी कल्‍पनाओं को हाथों द्वारा उकेरकर प्रस्‍तुत करता है। प्रकृति से जुड़ा यह शिल्‍पी अपने उपलब्‍ध सीमित साधनों की हस्‍त कृतियां बड़ी कुशलता से निर्मित करता है। इन आदिवासी गुड़िया कला में जिले में ही उपलब्‍ध प्राकृतिक एवं अनुपयोगी वस्‍तुओं का आकर्षक प्रयोग होता है।
       झाबुआ क्षेत्र के अधिकांश गुड़िया शिल्‍पी स्‍टफ्ड डाल का निर्माण करते हैं इस तरह के निर्माण में निश्चित आकारों में कटे कपड़ों को सिलकर उसमें रूई की सहायता से स्‍टफिंग की जाती है अंत: वे स्‍टफ्ड डाल कहलाती हैं। अब कुछ शिल्‍पी रेग डाल का निर्माण कर रहें हैं। जिसमे पहले कल्‍पना की गई गुड़िया के अनुरूप तार का ढांचा बना कर उसे बेकार कागज और कपड़े की पतली पट्टियों की सहायता से लपेट कर शिल्‍प बनाया जाता है। जिसकी निर्माण प्रविधि अलग से दी जायेगी।  यह आदिवासी गुड़िया शिल्‍प निर्माण कई चरणों में पूर्ण होता है।
     सर्वप्रथम शरीर के प्रत्‍येक अंगों के लिये कपड़े पर निर्धारित फर्मे से आकार बनाकर काटा जाता है। फिर उसे सिलाई कर आकार दिया जाता है तत्‍पश्‍चात उसमें रूई भरकर गुड़िया की मोटाई और गोलाई बनाई जाती है

गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
  (धड में रूई भरते हुए)     
गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
  (पेपर मेशी का चेहरा )    
गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
     (चेहरे का पिछला भाग)
         इस तरह अलग अलग हाथ, पैर, शरीर का मध्‍य भाग, हाथ के पंजे, पैर के पंजे  बनाया जाता है। चित्र क्रमांक -- । इन्‍हें मजबूती प्रदान करने के लिये इनके मध्‍य लोहे का तार लगाया जाता है चित्र क्रमांक --। अलग अलग अंगों के बन जाने पर इन्‍हें आपस में सिल कर जोड़ा जाता है। गुड़िया शिल्‍प का सिर बनाने के लिये सर्वप्रथम मोल्‍ड (सांचे या डाई) द्वारा प्‍लास्‍टर आफ पेरिस, पेपर मैशी अथवा मिट्टी, द्वारा चेहरा बनाया  जाता है। मोल्‍ड बन जाने पर उसे हवा में छांव में ही सुखा दिया जाता है, मोल्‍ड के सूख जाने के पश्‍चात उस पर कपड़ा तनाव देकर चिपकाया जाता है चित्र क्रमांक --। इसे पूर्व में बनाये शिल्‍प में सिलकर जोड़ दिया जाता है और इस तरह शिल्‍प के ढांचा का निर्माण पूर्ण होता है । अब प्रारंभ होता है उस शिल्‍प के अलंकरण का कार्य। जिसमें सर्वप्रथम उस शिल्‍प को आदिवासीयों की पारम्‍परिक अथवा देश के अन्‍य स्‍थानों की पारम्‍परिक वेशभूषा द्वारा अलंकृत किया जाता है। अंत में परम्‍परानुसार आभूषणों का चयन कर उन्‍हें सजाने संवारने का कार्य किया जाता है। और फिर शुरू होता अंतिम किन्‍तु महत्‍वपूर्ण भाव-भंगिमाओं के निर्माण का जिसे कुशल शिल्‍पी ब्रश व रंगों के माध्‍यम से आंखे, भौहें,‍ बिन्‍दी, गोदना, ओठ इत्‍यादि को अंकित कर शिल्‍प को आकर्षक, और जीवंत बनाता है। शिल्‍प निर्माण पूर्ण हो जाने के बाद उसे स्‍टैण्‍ड पर खड़ा करने के लिये मध्‍य में लगाये गये मोटे तार को लकड़ी के गुटके पर फिट कर‍ दिया जाता है।

गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
(शिल्‍प को स्‍टैण्‍ड पर खड़ा करने के लिये लगाये गये मोटे तार)

गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
 (अलग अलग हिस्‍सों को जोड़ते हुए)

      कभी कभी दीवार पर टांगने के लिये बनाये जाने वाले शिल्‍पों को फ्रेम में आदिवासी शस्‍त्रो तीर भाला या अन्‍य औजारों के साथ संयोजित कर पूर्ण किया जाता है। सामान्‍यत: गुड़िया का निर्माण 8 से 10 इंच तक किया जाता है लेकिन आधुनिक व्‍यावसायिक संदर्भो में मांग के अनुरूप 2 से 3 फुट और विशेष मांग पर 10 से 12फुट तक की आकृतियां बनाई जा रही हैं। चित्र क्रमांक – एवं --। 
        सम्‍पूर्ण झाबुआ क्षेत्र के गुड़िया शिल्‍पीयों द्वारा निर्मित आदिवासी भील भिलाला की आकृतियों में अमूमन एक सी भाव भंगिमा का अंकन मिलता है लेकिन झाबुआ के शिल्‍पी श्री उद्धव गिदवानी उनके बेटे सुभाष गिदवानी द्वारा अंकित भावों का अंकन अधिक परिष्‍कृत है। ये न केवल आदिवासी बल्कि उनके दैनिक क्रिया कलापों से संबंधित भावों का भी अंकन उत्‍कृष्‍ट है जैसे चक्‍की चलाते हुए, बच्‍ची का बाल बनाते हुए, धान साफ करते हुए इत्‍यादि।

गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua

गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua

गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabuaरेग डाल निर्माण प्रविधि-  निर्माण की प्रथम शृंखला में तार द्वारा प्रारंभिक ढांचा, बनाई जाने वाली गुड़िया के अनुरूप निर्मित किया जाता है इसके पश्‍चात बेकार कागज की कतरनों, कपड़ों के टुकडों से तार के स्‍ट्रक्‍चर पर लपेट कर इच्छित मॉडल बनाया जाता है। जिसे पतले सूती धागे द्वारा लपेट कर मजबूत किया जाता है। निर्मित मॉडल पर महीन लचीले कपड़े के पतले पतले पट्टियों से तनाव देकर सम्‍पूर्ण मॉडल को  लपेटा जाता है। रेग डाल में शिल्‍पों की पत्‍येक उँगली को कपड़े के महीन पट्टियों को अत्‍यंत बारीकी से लपेट कर बनाया जाता है।  रेग डाल में भी गुड़ियों के सिर के लिये स्‍टफ्ड डाल की तरह साचे में ढली आकृतियों का ही प्रयोग किया जाता है। इस तरह निर्मित शिल्‍पों में स्‍टफ्ड डाल की तुलना में लयात्‍मकता अधिक होती है।
गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua
गुडिया कला झाबुआ-Doll art Jhabua

  1. तार के प्रारंभिक ढांचा निर्माण हेतु सर्वप्रथम 14 गेज तार के दो टुकड़े 16--16  इंच लम्‍बाई का ले।
  2. लिये गये दोनों तारो में 6 इंच पर निशान लगाये और चित्र क्रमांक   में दिखाए अनुसार क्रास कर रखें
  3. अब दोंनों टुकड़ों को निशान लगे स्‍थान से प्‍लायर के माध्‍यम से लपेटना शुरू करें और लगभग तीन इंच तक लपेटे।
  4. अब 6 इंच वाले तार के छोर पर 4.25  इंच हाथ के लिये छोड़े और शेष भाग हथेली के लिये प्‍लायर
  5. द्वारा लपेट कर रखे।
  6. निचले तार में पैरो के लिये 5.75 इंच छोडकर शेष को पैरो के पंजे के लिये लपेट कर रखें
  7. अब 16 गेज वाले तार का एक टुकड़ा 5 इंच लम्‍बा लें।
  8. अब इस तार को बीच से मोड़ कर अब तक तैयार सांचे के दोनों हाथो के मध्‍य सिर के लिये मोडकर रखे। इस तरह 10 से 12 इंच लम्‍बा सांचा तैयार हो जायेगा।
  9. अब शुरू होता है इस तैयार सांचे पर कागज की कतरन बाँध कर इच्छित गुड़िया का आकार देना।
  10. सबसे पहले गुड़िया को भाव भंगिमा के अनुरूप तार को मोड़ना जैसे यदि नृत्‍य मुद्रा में बनाना है तो हाथो के उसी के अनुरूप मोड़ना।
  11. अब तैयार तार के सांचे में कागज की कतरनों को सूती धागों की सहायता से बाँध कर गुड़िया के शरीर का उचित आकार देवें। इस तैयार मॉडल का कंधा यदि स्‍त्री का तो 2;75 इंच, छाती की गोलाई 4;5 इंच और पुरूष के लिये छाती 4;75 इंच होनी चाहिए।
  12. कमर 2 इंच चौड़ी  और गोलाई 4;5 स्‍त्री के लिये और पुरूष के लिये 5 इंच गोलाई रखें।
  13. नितंब की गोलाई पुरूष के लिये 6 इंच और स्‍त्री के लिये 6;5 इंच रखे।
  14. (तार पर कतरन लपेटे हुए एवं तार पर शरीर के मध्‍य भाग पर पुरानी सूती कपड़ा लपेटे हुए)
  15. हाथ के पंजे बनाना:- हाथ की उंगलियों के लिये 24 गेज तार का  16 इंच लम्‍बा एक तार का टुकड़ा लें अब इस तार के टुकड़े को बीचों बीच मोडें और प्‍लायर की मदद से एक इंच तक ऐठन लगावे यह मध्‍यमा उँगली बनेगी
  16. अब इस उँगली के दोनो और दो उँगली के लिये एक एक इंच लम्‍बा ऐठन लगाकर उँगली और अंगूठे तैयार करे
  17. अब इसी तरह पैरों के पंजे बनाने के लिये 24 गेज तार का 17 इंच लम्‍बा तार ले और तार के एक किनारे से 4 इंच लम्‍बा से मोड़े और 1;1 इंच लम्‍बी उँगली प्‍लायर की मदद से ऐठन दे कर बनाये और उसके साथ ही हाथ की उंगलियों की तरह 1;1 इंच लम्‍बी अन्‍य उंगलियां तैयार करें । इसी तरह हाथ और पैर के दूसरे सांचे भी तैयार कर लें।
  18. तैयार हाथ और पैर के पंजों में अब कपड़ा लगाने के लिये अस्‍तर व जार्जेट का कपड़ा लगभग 1;4 मीटर ले, प्रत्‍येक उँगली के लिये कपड़े चौड़ाई आधा इंच और लम्‍बाई 10 इंच ले और चित्र में दिखाये अनुसार पहले अस्‍तर का एक स्‍तर फिर जार्जेट का स्‍तर लपेटे । रंग का चयन गुड़िया के शरीर के रंग के अनुरूप लें। इसी तरह पैरों की उंगलियां भी तैयार करें।
  19. अब इन हाथ और पैर के पंजों को कागज की कतरन बाँध कर तैयार सांचे के हाथ में सूती धागे से एवं कागज की कतरन से हथेली और पंजा तैयार करते हुए जोड़े।
  20. पुरानी सूती साडी का एक इंच चौड़ा और 1;5 मीटर लम्‍बी पट्टी फाड़े और सांचे के एक सिरे से लपेटना शुरू करे जहां पहली पट्टी खतम हो वहां दूसरी पट्टी जोडकर लपेटे और इस प्रकार सम्‍पूर्ण शरीर को लपेट कर पूर्ण करें।
  21. पुरूष शरीर में अब फेवीकाल ब्रश की सहायता से लगावे और उस शरीर के रंग के अनुरूप जार्जेट और लायनिग कपड़ा चिपकाये
  22. स्‍त्री शरीर के लिये पहले ब्रेस्‍ट के लिये आकार तैयार कर उसे फेवीकाल से चिपकाये और फिर उस पर जार्जेट का कपड़ा चिपकायें।
  23. अब चेहरा तैयार करने के लिये सबसे पहले तैयार चेहरे का मोल्‍ड ले उस पर ब्रश की सहायता से फेवीकाल लगाये और जार्जेट का 3इंच चौडा और 3 इंच लम्‍बा कपड़ा ले कर हल्‍के से तान कर चेहरे पर चिपकायें। चिपकाते समय होठ नाक और आंखों के उभार के पास सफाई से हाथ से दबा कर चिपकाये जिससे उनके उभार स्‍पष्‍ट दिखाई दे।
  24. अब 000 ब्रश ले कर काले पोस्‍टर रंग से आँख व पुतली बनावे सफेद रंग से आँख के अंदर रंग लगा आँख का आकार देवे फिर लाल रंग से ओंठ बनावे ।
  25. चेहरा पूरा करने के बाद अब सिर का पिछला भाग बनाने के लिये पीछे के खाली भाग पर रूई भर कर गोल आकार देकर कर सिर का पिछला गोल हिस्‍सा बनावे। अब जार्जेट को खीच कर पीछे सूती धागे की मदद से सिल दे । अब बालों वाले स्‍थान पर काला कपड़ा लगा कर सुई की मदद से सिलें ।
  26. काले कपड़े का एक इंच लम्‍बा और .2 इंच चौडा टुकडा ले उस पर नायलान के बाल के बाल के 4इंच लम्‍बे बाल को काले कपड़े के बीचोंबीच फेवीकाल की मदद से चिपका दे अब इसे सिर के बीचों बीच दो टांके लगाकर फिट करें और टूथ ब्रश की सहायता से उसे अच्‍छी तरह संवार दें।
  27. इस तैयार सिर को धड़ पर सिर के लिये निकाले गये 2;5 इंच के तार पर लगा कर सिर के निचले सिरे पर फेवीकाल लगाकर चिपका दें‍
  28. अब प्रांतीय वेशभूषानुसार उन्‍हें कपड़ों से सजाकर गुड़िया को आकार देवे एवं उसी के अनुरूप आभूषणों से उनका शृंगार कर उन्‍हें आकर्षण रूप दे।
  29. अब पेडेस्‍टल के लिये 3इंच चौडी 3इंच लम्‍बी और एक इंच उची लकड़ी का टु‍कड़ा ले। अब इस लकड़ी के टुकड़े के बीचों बीच एक इंच के अंतर पर दो छेद करें और तैयार गुड़िया को इस पर लगाने के लिये उसके पंजों के नीचे ब्रश की सहायता से फेवीकाल लगाकर उस पर निकले तारों को उन छेदों में फंसाकर प्‍लायर की मदद से तार मोड कर फिट करें। इस प्रकार गुड़िया तैयार हो जायेगी।


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Congratulations on the beginning of Asha Newspaper .... Sharp frown, fearless Journalism first Priority of the Newspaper . The Entire Team Deserves Congratulations... & heartly Best Wishes- कृष्णा वेणी देसावतु , पूर्व एसपी झाबुआ

आशा न्यूज़ का ताजा प्रकाशित अंक मैंने दो तीन पहले ही पड़ा था आशा न्यूज़ पर प्रकाशित खबरों की सामग्री अद्भुत है , समाज के हर एक पहलु धर्म , अपराध , राजनीती जैसी हर श्रेणी की खबरों को इस समाचार पत्र में बखूबी प्रस्तुत किया गया है जो पाठको और समाज के हर वर्ग के लोगो के लिए नितांत आवश्यक है , समाचार पत्र की नयी शुरुवात लिए बधाई !!- रचना भदौरिया , एडिशनल एसपी झाबुआ

महज़ ३ वर्ष के अल्प समय में आशा न्यूज़ समूचे प्रदेश का उभरता और अग्रणी समाचार पत्र के रूप में आम जन के सामने है , मुद्दा चाहे सामाजिक ,राजनैतिक , प्रशासनिक कुछ भी हो, हर एक खबर का पूरा कवरेज और सच को सामने लाने की अतुल्य क्षमता निश्चित ही आगामी दिनों में इस आशा न्यूज़ के लिए एक वरदान साबित होगी, संपादक और पूरी टीम को हृदय से आभार और शुभकामनाएँ !!- संजीव दुबे , निदेशक एसडी एकेडमी झाबुआ

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