26 january abvp Administrative Alirajpur b4 cinema balaji dhaam bjp cinema hall jhabua city crime cultural education election events Exclusive Famous Place gopal mandir jhabua Health and Medical jhabua jhabua crime Jhabua History matangi MPPSC MPRLM National Body Building Championship India photo gallery politics ram sharnam jhabua religious religious place Road Accident sd academy shailesh dubey social tourist place Video Visiting Place अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अंगूरी बनी अंगारा अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस अल्प विराम कार्यक्रम अवैध शराब आजाद आतंकवाद विरोधी दिवस आदिवासी विकास विभाग आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट ई-उपार्जन साफ्टवेयर ई-टेण्डर उत्कृष्ट विद्यालय उत्कृष्ट सड़क उद्यमिता उद्यानिकी सेमीनार उर्स ऋषभदेव बावन जिनालय एक पहल एम.पी. मोबाइल एमपी पीएससी कलावती भूरिया कलेक्टर कांग्रेस कांतिलाल भूरिया कृषि कृषि महोत्सव कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ कैथोलिक डायसिस कौशल विकास केंद्र क्रिकेट टूर्नामेंट खबरे अब तक गणगौर पर्व गल पर्व गायत्री शक्तिपीठ गुडिया कला झाबुआ गुडी पड़वा गेल गोकुल महोत्सव गोपाल मंदिर झाबुआ ग्राम सभा घटनाए चन्द्रशेखर आजाद जनसुनवाई जिला चिकित्सालय जिला जेल जिला पेंशनर एसोसिएशन जिला विकलांग केन्द्र झाबुआ जेईई जैन मुनि झाबुआ झाबुआ इतिहास झाबुआ का राजा झाबुआ पर्व झाबुआ राजवाड़ा झूलेलालजी जन्मोत्सव टीबी तहसीलदार थांदला दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि देवझिरी धनसिंह बारिया धार्मिक धार्मिक स्थल नगरपालिका परिषद झाबुआ नर्मदा सेवा उपयात्रा नवरात्री चल समारोह निर्वाचन आयोग निलंबन परख वीडियो कान्फ्रेंस परिवहन विभाग पर्यटन स्थल पल्स पोलियो अभियान पारा पेटलावद प्याउ प्रतियोगी परीक्षा प्रभारी मंत्री प्रशासनिक बाल कल्याण समिति बाल विवाह बोहरा समाज भगत सिंह भगौरिया पर्व भर्ती भाजपा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान भारतीय जैन संगठना म.प्र. राज्य कौशल विकास मिशन मध्यप्रदेश टूरिज्म मध्यप्रदेश पटवारी संघ मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन मध्यप्रदेश सडक विकास निगम मप्र डिप्लोमा इंजिनियर्स एसोसिएशन मल्टीप्लेक्स सिनेमा महाशिवरात्रि महिला एवं बाल विकास विभाग मिल बॉचे मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री उघमि योजना मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चोहान मेघनगर मोड़ ब्राह्मण समाज मोहनखेड़ा रक्तदान रक्तदान शिविर रंगपंचमी राजगढ़ राजनेतिक राजस्व निरीक्षक संघ राणापुर रानापुर रामनवमी रामशंकर चंचल रामा रायपुरिया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना रोजगार मेला रोटरी क्लब लेबर बजट लोक कल्याण शिविर वाटसएप विधायक शांतिलाल बिलवाल विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस विश्व क्षय दिवस विश्व हिन्दू परिषद विश्वकर्मा जयंती वेलेंटाईन डे शिक्षा सकल व्यापारी संघ संकल्प ग्रुप संत रविदास जयंती सत्यसाई सेवा समिति सरस्वती शिशु मंदिर सहायक आयुक्त साई मंदिर झाबुआ साक्षर भारत अभियान साज रंग झाबुआ सामाजिक सामूहिक विवाह सावित्रीबाई फुले पुण्यतिथि सांस्कृतिक स्टेट बैंक स्वच्छ भारत मिशन हज हजरत दीदार शाह वली हनुमान टेकरी हाथीपावा हिन्दू नववर्ष होली झाबुआ

        यह सच है कि मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में कम आबादी है और इस क्षेत्र की जनसंख्या के अधिकांश आबादी एक आदिवासी आबादी है. लेकिन जिले के पर्यटन स्थलों के रूप में अलग महत्व है. झाबुआ के पर्यटन स्थलों का भ्रमण धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व के रूप में अच्छी तरह से किया जा सकता है. झाबुआ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से कुछ पीपलखूंटा, समोई , तारखेडी, भाबरा, देवझिरी, लखमनी, हाथीपावा पहाड़ी , मालवई, आमखुट , अनास नर्सरी आदि हैं वही धार्मिक पर्यटन स्थलों में हनुमान टेकरी , वनेश्वर हनुमान मंदिर, गोपाल मंदिर, मातंगी धाम, सिद्धपीठ बालाजी हनुमान मंदिर , साईं मंदिर, प्राचीन कलिका मंदिर, चिंतामणि गणेश मंदिर, बावड़ी हनुमान मंदिर , राम शरणम् , आदि है. 
झाबुआ पर्यटन स्थल (Tourist Places- Famous Visiting Place Jhabua District)
        यहां मुख्यत: भील और भीलाला आदिवासी जातियां रहती हैं। यह जिला आदिवासी हस्तशिल्प खासकर बांस से बनी वस्तुओं, गुडियों, आभूषणों और अन्य बहुत-सी वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध है। अलीराजपुर जो की पूर्व में झाबुआ जिले का ही हिस्सा था वर्ष 2008 में अलीराजपुर को अलग जिला बनाया गया जिससे की कई पर्यटन स्थल अलीराजपुर जिले में बट गए उक्त सभी पर्यटन स्थलों को भी उक्त सुची में शामिल किया गया है , झाबुआ शहर से महज़ 75  किमी की दुरी पर स्थित यह जिला पर्यटन हेतु एक बेहतर विकल्प है कट्ठीवाड़ा के घने जंगल यहाँ की मुख्य विशेषता है बारिश के दिनों में यहाँ का नज़ारा कश्मीर की वादियों की तरह दिखने लगता है।  
         झाबुआ नगर को प्राचीन मंदिरों की धरोहर कहे तो गलत नहीं होगा इन मंदिरों और दरगाहो के प्रति भक्तो की आस्था देख जिले के दिवंगत प्रगान ज्योतिष श्री विश्वनाथ जी त्रिवेदी जी ने कहा था की ""आध्यात्मिक उन्नयन की द्रष्टि से झाबुआ नगर उपयुक्त है और भविष्य में यह अच्छी तरक्की करेगा ... यहाँ पर 1990 के बाद पुण्यात्मा अधिकाधिक जन्म लेगी .. दुश्प्रवातियो का नाश होगा और शने: शने: सदप्रवत्तियों का उदय होगा "" वाकई में यह बात आज सत्य प्रतीत हो रही प्राचीन स्थलों, ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोधार कर उन्हे उपयुक्त बनाना, उनकी देख- रेख और सफाई कर मंदिरों के प्रति आस्था प्रकट करना इसी बात का संकेत है
भाबरा
     यह अलिराजपुर जिले के जोबट तहसील में जोबट दाहोद रोड पर ३२ किलोमीटर की दुरी के लगभग उत्तर - पश्चिम क्षेत्र में है.भाबरा एक पर्यटन स्थल के रूप में लोकप्रिय है क्योंकि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद भाबरा में ही पैदा हुवे थे. हाल ही में मध्य प्रदेश शासन द्वारा चंद्रशेखर आजाद की प्राचीन कुटिया का जीर्णोधार कर यहाँ एक भव्य स्मारक बनाया गया है ... साथ ही मध्य प्रदेश शासन द्वारा भाबरा शहर का नाम परिवर्तन कर आजाद नगर भी कुछ समय पहले ही किया है

shahid-chandrashekhar-azad-kutiya-bhabra-चंद्रशेखर आजाद भाबरा

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देवझिरी
       देवझिरी एक प्राचीन मंदिर है जैसा की नाम से ही प्रतीत है की भगवान शिव (देव, एक देवता) और झिरी या एक बारहमासी वसंत ! वसंत एक कुंड में निर्मित किया गया है. एक समाधि बैसाख पूर्णिमा, जो अप्रैल के महीने में आयोजित की जाती है. देवझिरी तीर्थ में भगवान शिव का भव्य मंदिर चारो तरफ हरियाली युक्त द्रश्य और मंदिर प्रांगन में ही एक जल कुंड जहा पिछले कई वर्षो से नर्मदा नदी का जल अनवरत प्रवाहित हो रहा है ,, जल का निकास और मार्ग आज तक सभी भक्तो के लिए एक आश्चर्य का विषय है की यह जल कुंड यहाँ तक किस मार्ग से आ रहा है .. देवझिरी तीर्थ एक धार्मिक, ऐतिहासिक, पर्यटन और एक चमत्कारिक स्थल जहा भक्तो की सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है

devjhiri-jhabua-देवझिरी तीर्थ झाबुआ-झाबुआ पर्यटन स्थल (Tourist Places- Famous Visiting Place Madhya Pradesh State-Jhabua District)

पूरा इतिहास जाने
लक्ष्मणी तीर्थ
       लखमनी ग्राम सुकर नदी के तट पर स्थित एक छोटा सा गांव है. इस गांव में एक नवनिर्मित जैन मंदिर है. गांव १९२५ के मध्य प्रमुखता से पुरातत्वविदों, इतिहासकारों के मध्य प्लास्टिक कला के रूप में आ गया .. जब इस मंदिर में प्रतिष्ठापित जैन छवियों का एक क्षेत्र से पता लगाया गया. छवियों दूधिया सफेद , संगमरमर और काले संगमरमर की थी ... इन छवियों को संमूसा नाम दिया गया .. तत्पश्चात स्थल को खुदवाया गया तो यहाँ से जैन छवियों के अलावा हिंदू देवी - देवता और हिंदू मंदिर के अवशेष की छवियों भी पाई गयी .यह सभी मूर्तियां 10 वीं से 11 वीं सदी की शैली की थी . इन सभी छवियों की प्राप्ति के बाद से लखमनी ग्राम को एक तीर्थ (पवित्र स्थान) के रूप में विकसित किया गया .... इसके उपरांत प्रतिवर्ष यहाँ एक वार्षिक मेला आयोजित किया जाता है.

तीर्थ परिचय
ऐतिहासिक तीर्थ लक्ष्मणी की महिमा अपार      

       अलीराजपुर से मात्र 8 km की दुरी पर यह महान तीर्थ स्तिथ हैं जहाँ पर परम पूज्य तीर्थाधिपति मूलनायक श्री पद्मप्रभु भगवान की हजारों वर्ष प्राचीन दुर्लभ भूगर्भ से निकली श्वेतवर्णी चमत्कारी प्रतिमा स्थित हैं जिसके दर्शन मात्र से मन को असीम शान्ति का अनुभव होता है इस तीर्थ की पुरे क्षेत्र में बड़ी महिमा है चैत्री पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा एवं मगसरसुदी 10 के दिन प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र एवं पुरे देशभर से दर्शनार्थी इस तीर्थ के दर्शन करने आते है एवं सेवा पूजा का लाभ लेते है ये तीर्थ जैन ही नहीं अपितु अन्य समाज जन में भी लोकप्रिय है इसीलिए यह जैन तीर्थ जन तीर्थ के भी नाम से जाना जाता है इस तीर्थ में समय समय पर होने वाले चमत्कार के भी कई लोग साक्षी रहे हैं पुरे भारतभर में कुछ गिनी चुनी जगह पर ही मूलनायक के रूप में पद्मप्रभु भगवान की प्रतिमा स्थित हैं इस तीर्थ की ऐसी मान्यता है कि यहाँ से कोई भी ख़ाली हाथ नहीं जाता है
        विक्रम संवत 1427 में जैन मुनिराज जयानंद नामा के अनुसार तीर्थ लक्ष्मणी में 101 जिनालय एवं 2000 जैन धर्म अनुयायीयो के घर थे विक्रम की सोहलवी सदी में यह तीर्थ विद्यमान था एवं प्राचीन लेखों में इस तीर्थ की प्राचीनता कम से कम 2000 वर्ष से भी पूर्व समय की हैं।
         विक्रम की 19 वीं सदी में इस तीर्थ पर यवनो के आक्रमण के कारण इस तीर्थ का नाम ही शेष रह गया था। इस स्थान के आसपास कुछ समय पश्यात कृषक के खेत से सर्वांग सुन्दर चौदह प्रतिमा प्राप्त हुई जिनमे से सबसे बड़ी प्रतिमा पद्मप्रभु भगवान की श्वेतवर्णी प्रतिमा थी।
       तत्कालीन नरेश श्री प्रतापसिंह जी के द्वारा तीर्थ निर्माणार्थ भूमि उपहार स्वरूप दान की गई एवं सभी के सहयोग से मंदिर का नवनिर्माण किया गया विक्रम संवत 1994 मगसरसुदी 10 को परमपूज्य आचार्य देव श्रीमद यतिंद्रसूरीश्वर जी म.सा. के कर कमलो से नवनिर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई गई जिसमें मूलनायक के रूप में पद्मप्रभु भगवान की प्रतिमा को एवं अन्य प्रतिमा को विराजित किया गया इस प्रकार इस तीर्थ की पुनः स्थापना हुई ।
        तक़रीबन 8 एकड़ मै फैले इस तीर्थ क्षेत्र में परमपूज्य दादा गुरुदेव श्री राजेंद्रसूरीश्वरजी म.सा. का मंदिर भी है और पावापुरी जलमंदिर की प्रतिकृति भी बनी हुई है इसके अलावा श्रीपाल और मयणा सुंदरी के जीवन प्रसंगों का पूरा वृतान्त अत्यन्त आकर्षक भिति चित्रो के द्वारा प्रस्तुत किया गया है जो की दर्शनीय है लक्ष्मणी तीर्थ के समीप 100 km के दायरे में श्री तालनपुर, मोहनखेड़ा, भोपावर, अमझेरा तीर्थ स्तिथ है जिससे लक्ष्मणी तीर्थ पर आने वाले दर्शनार्थी को पंचतीर्थि का भी लाभ मिलता है हाल ही में तीर्थ पर आने वाले दर्शनार्थियो के लिये नविन भोजनशाला एवं एयरकंडिशनर धर्मशाला का निर्माण हुआ है

   ऐसे पहुंचे लक्ष्मणी तीर्थ    
 
      यह तीर्थ अलीराजपुर से 8 किमी और झाबुआ से 85 किमी दुरी पर है।  बस के माध्यम से यहाँ आसानी से पंहुचा जा सकता है धार जिले से इस तीर्थ की दुरी 135 किमी , बड़वानी से 75 किमी,  दाहोद से दुरी 78 किमी एवं वडोदरा से दुरी 135 किमी पड़ती है।

लक्ष्मणी तीर्थ- laxmani-jain-tirth-alirajpur-jhabua-लखमनी ग्राम जैन मंदिर
मालवई
मालवई अलीराजपुर- malwai-alirajpur      मालवई अलीराजपुर जिले  में विंध्याचल रेंज के उत्तरी तलहटी पर निर्मित है.. वहाँ एक प्राचीन लेकिन छोटे खंडहर वाला शिव मंदिर है. मंदिर के मंच आयताकार है, लेकिन कई शंक्वाकार कॉलम मंदिर के कलश तक पहुची हुई है , कलश वर्तमान में गिर गया है .शंक्वाकार कॉलम के सामने भाग भी गिर गया है. पेनल्स की सामने की पंक्ति में कई खूबसूरत और नक्काशीदार छवियों को बनाया गया है जो 12 वीं से 13 वीं सदी के बीच की प्रतीत होती है ...


मोहनखेड़ा जैन तीर्थ 
      मोहनखेड़ा में श्वेतांबर जैन समाज का एक ऐसा महातीर्थ विकसित हुआ है, जो देश और दुनिया में ख्यात हो चुका है। श्रीमद् विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराज साहब की यह तीर्थ नगरी मानवसेवा का भी तीर्थ बन चुकी है। झाबुआ शहर से महज़ 44 कि.मी धार शहर से 46 कि.मी और राजगढ़ शहर से लगभग डेढ़ मील की दूरी पर स्थित यह तीर्थ पर्यटन के लिए एक बेहत ही रमणीय स्थल है , एकांत में विशाल परकोटे के अन्दर आचार्य श्री राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराज द्वारा श्री मोहनखेड़ा तीर्थ की प्रतिष्टा संपन्न हुई थी श्री राजेंद्र सूरीश्वरजी का समाधी स्थान भी यही है.
       प्रति वर्ष यहां कार्तिक पूर्णिमा, चैत्र पूर्णिमा तथा पौष शुक्ला सप्तमी को मेले लगते है जिनमे हजारो भक्तगण भाग लेकर प्रभु की भक्ति का लाभ उठाते है इसी परकोटे में मंदिर के निकट ही आचार्य श्री राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराज व श्री यतिन्द्र सूरीश्वरजी महाराज के विशाल कलात्मक समाधी मंदिर है , तीर्थ स्थल ऐसे समतल एवं सुरमय स्थान पर निर्मित है जिससे यह़ा के आंतरीक एवं दृश्य अतीव आकर्षित है मंदिर परिसर में स्मृति मंदिर, श्री यतींद्रसूरीजी व श्री विद्याचन्द्रसूरीजी गुरु समाधि मंदिर, जय तलहटी, भव्य प्रवेश द्वार, महावीर सर्कल, भव्य उधान, महावीर जलाशय, जैन गुरुकुल, हाईस्कूल, मानव सेवा मंदिर, नेत्र-चिकित्सालय, कुंदन गौशाला, प्रवचन कार्यालय, शोध-संस्थान आदि अनेक उपक्रम मोहनखेड़ा तीर्थ समिति द्वारा संचालित है.
     जन जन की आस्था का प्रतिक श्री मोहनखेड़ा तीर्थ मालवा का सबसे मुख्य तीर्थ बन गया है प्रतिवर्ष चैत्र पूर्णिमा व पौष शुक्ल सप्तमी पर भव्य मेला लगता है. मुख्य सड़क से जुड़ा भव्य प्रवेश द्वार के पास सुन्दर जय तलेटी मंदिर बना है अव्दितीय श्री जयंतसेन म्यूजियम  राजगढ़ से ढाई कि .मी. व श्री मोहनखेड़ा तीर्थ से मात्र आधा कि .मी. की दुरी पर श्री जयंतसेन म्यूजियम स्थित  है.
        करीब सवा तीन लाख वर्ग फीट भूमि पर स्वस्तिक आकार का “म्यूज़ियम” व मालवा का प्रथम भव्य-दिव्य “कीर्ति-स्तंभ” है श्री राज राजेंद्र तीर्थ दर्शन का निर्माण एक संकूल के रूप में हुआ है. म्यूज़ियम नौ खंडो का वर्गीकरण जैन संस्कृति के विविध पर आधारित है. संबंधित विषयों का प्रदर्शन विभिन्न आकृतियों, मॉडल्स एवं चित्रों के माध्यम से किया गया है.  इसे ठीक से देखने में तीन घंटे लगते है.
        इसी परिसर में सुन्दर कलात्मक गुरूमंदिर में दादा श्री की आदमकद 75 इंची ऊँची प्रतिमा बिराजमान है. वर्तमान में श्री पारसनाथ प्रभु जिनमंदिर, गुरुमंदिर, योग एवं ध्यान केंद्र, आराधना केंद्र, सुविशाल सभागृह ज्ञान भण्डार, मनमोहक उधान, जैन दर्शन को दर्शाती झाकियां, कलात्मकता से परिपूर्ण दो मुख्य प्रवेश द्वार, सुंदर पेढ़ी : शीतल जल से आपूरित प्याऊ आदि यहाँ के मुख्य आकर्षण है.  करीब 100 कमरों की आधुनिक धर्मशाला व सुंदर भोजनशाला की उत्तम व्यवस्था है

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हाथीपावा
        मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल झाबुआ शहर को हरा भरा बनाने और शहर का वाटर ग्राउंड लेवल बढाने के उदेश्य से झाबुआ की हाथी पावा टेकरी को हरा भरा करने एवं उसके बंजरपन को दूर कर वहां एक बडा जंगल लगाने के लिये जिला प्रशासन, वन विभाग, समाज सेवी संस्थाएं और नागरिक मिलकर सामूहिक भागीरथी प्रयास कर रहे है। जिसके अंतर्गत विगत 9 जुलाई 2017 को जनप्रतिनिधि सामाजिक संगठनों के सदस्य, शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थियों तथा शासकीय अधिकारी कर्मचारियों ने उक्त हाथीपावा टेकरी पर साढ़े 8 हजार से अधिक पौधे रोपे।
          नगर के पश्चिमी छोर पर स्थित है हाथी पावा की विशाल पहाडी जहां पर कभी घना जंगल होता था जिसके कारण शहर के छोटा तालाब, बहादूर सागर तालाब और मेहताजी के तालाब के साथ ही साथ झाबुआ शहर का ग्रांउड वाटर लेवल बढता था और ये तालाब इस पहाडी से रिसने वाले पानी की बदौलत भर जाया करते थे। लेकिन पिछले कई सालों से उक्त पहाडी से जंगल कट जाने से यह बंजर भूमी हो गई थी। कुछ सालों पहले इस पहाडी पर प्रदेश सरकार ने इसे हरी भरी करने का प्रयास किया था और राले गांव सिद्वि की तर्ज पर इसे हरा भरा करने के लिये यहां पर पर्यावरण विद अनिल अग्रवाल और अन्ना हजारे को लाकर इस पहाडी को हरा भरा करने के प्रयास किये गये थे।

हाथीपावा पहाड़ी झाबुआ -haathipawa-jhabua-shivganga-halma-शिवगंगा-हलमा

हाथीपावा पहाड़ी झाबुआ -haathipawa-jhabua-shivganga-halma-शिवगंगा-हलमा

आमखुंट 
     आमखुंट अलीराजपुर विंध्याचल रेंज के जंगलों के बीच स्थित है. यह एक प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण प्राप्त स्थल है. कनाडा ईसाई मिशनरियो ने आदिवासी गांवों के बीच वर्ष 1914 में ईसाई मिशनरियो का एक केंद्र स्थापित किया ....

आमखुंट अलीराजपुर भील ईसाई मिशनरी 5 नवम्बर 1914 -Bhil-Isai Missionary-Alirajpur-Aamkhut-5-november-1914
भील ईसाई मिशनरी आमखुंट
आमखुंट अलीराजपुर जंगल-aamkhunt-alirajpur
आमखुंट अलीराजपुर 
धमोई तालाब
       शहर की पेय जल व्यवस्था का मुख्य स्त्रोत धमोई तालाब बारिश के दिनों में पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है , सेकड़ो की तादाद में प्रतिदिन आसपास के रहवासी और अन्यत्र पर्यटक यहाँ पिकनिक मनाने और फोटोग्राफ़ी करने यहाँ पहुंचते है , बारिश के दिनों में तालाब पूर्ण भरने के बाद वेस्टवेयर से पानी का निकास झरने के रूप में देखने को मिलता है , प्राकृतिक सौन्दर्य एवं नैसर्गिकता का यह दृश्य निश्चित रूप से बेहत मनमोहक और लुभावना है , हालाकि सुरक्षा की दृष्टि से यहाँ पहुंचने का मार्ग बेहत पेचीदा है और यहाँ हादसों की आशंका लगातार बानी रहती है बावजूद इसके प्रतिदिन बड़ी तादाद में पर्यटक लुत्फ़ उठाने यहाँ  पहुंचते है

   ऐसे पहुंचे   
 
      धमोई तालाब की झाबुआ शहर से दुरी 28 किमी है ,अतः यहाँ पहुंचने के लिए पर्यटकों को झाबुआ से पारा एवं कलमोडा होते हुए धमोई तालाब तक पंहुचना होता  है।

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मोहनकोट 
     यह छोटा-सा गांव झाबुआ  जिले के पेटलावद से दक्षिण दिशा में 11  किलोमीटर दूरी पर स्थित है। मोहनकोट के नजदीकी दर्शनीय स्थल हैं। जो कि नन्दर माता के मन्दिर के नाम से जाना जाता हे जो कि एक छोटी सी घाटी पर खुले मैदान मे स्थित हे यहा पर चोरी नही होती है।

मोहनकोट नन्दर माता मंदिर - mohankot-nandarmata-mandir-petlawad
मोहनकोट नन्दर माता मंदिर 
गोपाल मंदिर झाबुआ
    झाबुआ शहर के मध्य भाग में स्थित गोपाल मंदिर झाबुआ की स्थापना 48 वर्ष पूर्व १० मई १९७० को की गई।  मंदिर निर्माण के समय मंदिर के समीप ही ३३ निवास स्थलों के सदस्यों का छोटा सा ऋषिकुल आज 48 वर्ष बाद हजारो भक्तो कि आस्था व प्रेम वाला ऋषिकुल आश्रम बन चूका है।
       सेकड़ो वर्ग फ़ीट में फैला यह गोपाल मदिर शहरवासियों और पर्यटकों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है मंदिर प्रांगण में भव्य बगीचा सुंदरता में चार चाँद लगाता प्रतीत होता है। मंदिर प्रांगण में ही गोपाल वाचनालय जिसमे की प्राचीन, मध्यकालीन और महापुरुषों के विभिन्न ग्रंथो और पुस्तकों का विशाल संग्रह शहरवासियो के लिए निश्चित ही एक अनुपम सौगात है, समीप ही गोपाल शिशु विद्या मंदिर स्कूल में सेकड़ो बच्चो को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है,
 गोपाल मंदिर ट्रस्ट द्वारा भक्तो की सुविधा हेतु ऑनलाइन दर्शन सुविधा का अनावरण कुछ समय पहले ही किया गया है गोपाल मंदिर की वेबसाइट पर इस सुविधा का लाभ लिया जा सकता है ।
      झाबुआ शहर कि सांस्कृतिक व धार्मिक छवि को पल्वित और पोषित करने हेतु गोपाल मंदिर व ऐसे ही कई मंदिर जो पिछले कई वर्षो से अपने प्राचीन इतिहास को यथावत रखते हुए भक्तो के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है उनका भी महत्वपूर्ण योगदान है . शहर के मध्य भाग में स्थित होने के कारन गोपाल मंदिर तक पहुंचने हेतु आवागमन के पर्याप्त साधन उपलब्ध है दूरस्थ भक्त या पर्यटक गोपाल मंदिर पहुंचने हेतु मेघनगर रेलवे स्टेशन जो की झाबुआ से महज़ १५ किमी की दुरी पर है जहाँ पर देश भर के लगभग सभी स्थानों से ट्रैन का आवागमन अनवरत चलता रहता है , जिसके माध्यम से पहुंच सकते है 

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मातंगी धाम 
   
matangi darshan mandir jhabua मातंगी मंदिर
        सेकड़ो फ़ीट की उचाई पर स्थित मातंगी मंदिर चारो और से हरियाली से ढकॉ हुआ है। पर्यटन के लिहाज़ से मातंगी मंदिर बेहत ही रमणीय स्थल है , मंदिर में खडे होकर जिस और भी नजर जाती हरियाली और सुंदरता से भरे दृश्य ही दिखाई देते ।
      मंदिर के समीप ही विशालकाय तालाब  मंदिर की सुंदरता को और बढ़ाता हुआ दिखाई देता है , मातंगी मंदिर प्रांगण में ही सिद्धपीठ बालाजी धाम और पारद शिवलिंग का महादेव मंदिर भी यही पर स्थित है , फरवरी 2011 में मातंगी धाम झाबुआ में नवनिर्मित मंदिर स्थल का निर्माण पश्चात् मातंगी की मूर्ति स्थापना की गयी , कार्यक्रम चार दिनों का था जिसमे मातंगी मूर्ति की स्थापना के साथ ही मातंगी का पाटोत्सव भी भव्य रूप में मनाया गया।  मातंगी मंदिर शहर के बिल्कुल मध्य भाग में स्थित है । मातंगी मंदिर इंदौर अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही स्थित है।
Nakshatra Vatika-नक्षत्र वाटिका झाबुआ नक्षत्र वाटिका, नवग्रह के पौधे     मातंगी ट्रस्ट द्वारा हाल ही में सर्वजन हित हेतु नक्षत्र वाटिका तैयार की जा रही है , उक्त वाटिका को उत्तराखंड से पौधे लाकर झाबुआ की नक्षत्र वाटिका को तैयार किया जाएगा संभवतः प्रदेश की पहली व उत्तराखंड के बाद देश की दूसरी नक्षत्र वाटिका झाबुआ में स्थित होगी ।  वाटिका स्थल को लगातार तैयार किया जा रहा है।
      10 हजार वर्गफीट में वाटिका तैयार करने की योजना बनाई गई है।  मंदिर के चारों तरफ से अलग-अलग तरह के पौधे लगाए जाएगे। इसके लिए तीन अलग-अलग हिस्से घाटी पर तैयार किए गए है। यह 30-30 फीट के रहेंगे। 20 फीट की सर्पाकार सीढ़ी बनाई जा रही है। यहां नक्षत्रों के अनुसार 27, नवग्रह के 27, 5 पूजन-हवन में उपयोगी और 49 पौधे आकर्षण के लिए लगाए जा रहे हैं।

मातंगी धाम , पूरा इतिहास जाने
समोई बाबा देव दर्शन
    झाबुआ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल , बाबा देव ग्राम समोई ब्लॉक राणापुर भक्तो की  असीम आस्था और धर्म के प्रतीक  है।  संस्कृति समाज का दर्पण होती है, जहां आस्था व विश्वास होता है वहां श्रद्धालु को पूरा सुकुन मिलता है। आदिवासी संस्कृति में बाबा देव का स्थान बहुत ही अहम है, जनजन की आस्था यहां उमड़ती दिखाई देती है।
             कहा जाता है कि जहां विज्ञान की सीमाएं समाप्त होती है वहीं से आध्यात्म की शुरुआत होती है। अंचल के राणापुर विकासखंड के समोई के डूंगरवाला बाबादेव का माहत्म्य भी जन-जन की आस्था का प्रतीक है। यहां हजारों लोगों की मन्नत पूरी होती है।

समोई बाबा देव दर्शन- डूंगरवाला बाबादेव- samoi-ranapur-babadev darshan-dungarwala babadev-jhabua
श्री विश्वमंगल हनुमान धाम तारखेड़ी
         धार के समीप झाबुआ जिले के तारखेडी ग्राम में चमत्कारी विश्वमंगल हनुमान का मंदिर है | यहाँ मंगलवार व शनिवार को दर्शनार्थियों की भीड़ जमा रहती है।  यहाँ लोगो का मानना हे की मूर्ति के दर्शन मात्र से मनोकामना पूर्ण होती है।  श्री विश्वमंगल हनुमान धाम तारखेड़ी में विराजित विश्वमंगल हनुमानजी स्वयंभू है और मूर्ति भी पूज्यगुरुदेव को स्वप्नावस्था में दर्शन देने के बाद उसी स्थान से खुदाई कर निकाली गई है  इस बारे में पंडित कालीचरण दास वैष्णव ने बताया की इनके पिता राम प्रसन्न वैष्णव ने 12 मई 1957 शनिवार जयेष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को  पूर्व जन्मनुकृत प्रेरणा शक्ति से पेटलावाद तहसील के ग्राम तारखेडी में विश्व मंगल हनुमान मंदिर की स्थापन कराई  थी , गुरुदेव को स्वप्नावस्था में दर्शन देकर हनुमान जी ने अपनी उपस्थिति का अहसास करवाया तब स्वयं गुरुदेव महाराज ने जमीन खुदाई कर मूर्ति निकाली और प्रतिष्ठित कर मंदिर का निर्माण करवाया  तभी से दर्शनार्थियों का ताता लगा रहता है |
       प्रति मंगलवार लाल चन्दन और सिंदूर से सुन्दर कपडे और आभूषणों से सजाकर हनुमान जी को चोला चढाया जा रहा है।  स्वयं के एवं चढावे की राशि से मंदिर में पूजापाठ,भजन कीर्तन , सुन्दर कांड कीर्तन के साथ होता रहता है।  स्वंय दर्शनार्थी और भक्त हनुमान जी के चमत्कारों के किस्से सुनाते है।  विपरीत परिस्तिथियों से उबर कर स्वास्थ लाभ रोग मुक्ति एवं मनोकामनाये पूर्ण होने के अनुभव सुनाते है |
     प्रति मंगलवार् , दोनों नवरात्रि , हनुमान जयंती , गुरुपूर्णिमा को चोला , अभिषेक , पूजन , संगीतमय सुन्दरकाण्ड , हवन , उत्तरपुजन , पूर्णाहुति , मंगल आरती के बाद गुरूदेव द्वारा मंत्रित गदा का आशीर्वाद हनुमानयंत्र को लाल चन्दन से निर्मित कर पूजन के बाद यंत्र के मंत्रो को शुद्ध जल में मिलाकार स्वयं के पीने हेतु , हवन घृत को लकवा शारीरिक पीड़ा में मालिश हेतु , हवन भस्म को ललाट पर लगाने और स्वयं के ग्रहण हेतु दिया जाता है।  
        विश्वमंगल धाम के शिवालय की स्थापना पूज्य गुरुदेव श्रीरामप्रपन्न जी वैष्णव महाराज ने 20 फरवरी 1955 महाशिवरात्री को की और शिवलिंग भी स्वयंभू है । इस स्थान पर प्रारम्भ सेवा में प्रति सोमवार और महाशिवरात्रि पर रूद्र अभिषेक , पूजन , पीठ पूजा , यंत्रपूजा , परिवार पूजन , संगीतमय शिवलीला बालकाण्ड का आयोजन किया जाता है । साथ ही प्रति मंगलवार दोप.12.30 से 1.00 बजे तक दिव्य ध्यानयोग का आयोजन किया जाता है। 

   ऐसे पहुंचे तारखेड़ी     
   
         झाबुआ शहर से तारखेड़ी की दुरी  किमी है , यहाँ पहुंचने के लिए झाबुआ से पेटलावद होते हुए या झाबुआ से राजगढ़ होते हुए  यहाँ पंहुचा जा सकता है पेटलावद से तारखेडी की दुरी 22 किमी है। 

श्री विश्वमंगल हनुमान धाम तारखेड़ी झाबुआ पेटलावाद vishvamangal hanuman mandir tarkhedi jhabua petlawad
पीपलखूंटा
     मध्यप्रदेश के पश्चिमी सीमान्त पर स्थित झाबुआ जिला मुख्यालय से २३ कि.मी. दूर एवं पश्चिमी रेलवे  दिल्ली मुंबई रेल मार्ग के मेघनगर रेलवे स्टेशन से ८ कि.मी. दूर कल-कल कर बहती हुई पवित्र पद्मावती नदी के किनारे सुरम्य पहाड़ी पर चमत्कारिक हनुमानजी का मंदिर तपोभूमि पीपलखूंटा आश्रम मध्यप्रदेश, राजस्थान , गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में ख्याति प्राप्त होकर जन-जन की आस्था एवं श्रधा का केंद्र है कहा जाता है कि रावण पूत्र मेघनाथ के अत्याचारों से त्रस्त ऋषि मुनियों ने घने जंगलो में स्थित ऊँची पहाडियों एवं कन्दराओ में शरण लेकर तपस्या की थी उन्हीं में से महर्षि पिपलाद एवं विश्वामित्र जी ने वर्षो तक इस वन में तपस्या की थी |
       इस तीर्थ को ख्याति दिलाने वाले महंत श्री जमनादासजी महाराज ने अपने गुरु महंत श्री साँवलादास जी महाराज की आज्ञा से वर्तमान स्थल पर पीपल के विशाल पेड़ के नीचे विराजित हनुमानजी की सेवा तथा पूजा अर्चना एवं तपस्या कर इस तपोस्थल को जागृत किया ! पूर्व में यह स्थान घने जंगलो के बीच स्थित था जहाँ हमेशा जंगली जानवरों का डेरा डला रहता था एवं सदा उनसे भय बना रहता था एवं इस बियाबान स्थल पर जाने से लोग डरते थे किन्तु धीरे धीरे इस स्थान के आस पास आदिवासी ग्रामीण  बसने लगे एवं यह पवित्र स्थल तीर्थ रूप में परिवर्तित हो गया |
     महंत श्री जमनादासजी महाराज  द्वारा वर्ष १९५२ में १०१ कुण्डीय श्री राम यज्ञ , वर्ष १९७६ में ११११ कुण्डीय एव वर्ष १९७९ में २५२५ कुण्डीय वृहद स्तरीय श्री राम यज्ञ संपन कराये जिसमे हजारो कि तादाद में भक्तो ने सम्मिलित होकर लाभ लिया, इसी बीच  मंदिर श्रेत्र का विकास भी करवाया एवं मंदिर में २४ अवतारों की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा करवाया साथ ही मंदिर, भोजनालय- रसोईघर संतो एव भक्तो हेतु आवास ,गौशाला आदि का निर्माण करवाया जो पूर्व समयानुसार कनची दीवारों एव कवेलू के छापरो से बने हुए हे.
       आश्रम परिसर में विशाल मंदिर, सत्संग भवन, संतो एवं भक्तो हेतु सुविधायुक्त आवास निर्माण, गौशाला निर्माण, संस्कृत पाठशाला, चिकित्सालय, भोजनशाला, भव्य बगीचा आदि है।  गुरु पूर्णिमा , नवरात्री , हनुमान जयंती , राम नवमी पर देश भर से हज़ारो की तादाद में भक्त यहाँ  दर्शन हेतु पहुंचते है 

   ऐसे पहुंचे पीपलखूंटा     
   
         झाबुआ शहर से पीपलखूंटा की दुरी 26 किमी है , मेघनगर से रम्भापुर होते हुए   यहाँ पंहुचा जा सकता है मेघनगर से पीपलखूंटा की दुरी महज़ 10 किमी है  

झाबुआ पीपलखूंटा  हनुमान मंदिर -pipalkhuta-hanuman-mandir-jhabua-meghnagar-madhya pradesh-india
हनुमान टेकरी
           झाबुआ शहर के शीर्ष पर और तल से लगभग ७० फिट उचाई पर स्थित हनुमान टेकरी मंदिर .... झाबुआ जिले के इतिहास में एक अलग महत्वता का परिचय कराता  है . जैसा की नाम से ही स्पष्ट है की हनुमान टेकरी . टेकरी शब्द उची , और टेकरी पर निर्मित मंदिर की संरचना का आभास कराता है मंदिर प्रांगन में खडे होकर पूरे झाबुआ शहर का अदभुद नज़ारा देखा जा सकता है इतनी उचाई से पूरे शहर का द्रश्य रात्रि के समय और भी विहंगम हो जाता है .. निश्चित रूप से हनुमान टेकरी झाबुआ शहर के मानचित्र पर स्थित एक ऐसी कलाकृति , एक ऐसा अतुल्य और अमूल्य स्थान जहा पर एक बार जाने के उपरांत वर्षो तक यहाँ की भव्य छवि प्रत्येक भक्त के जहन में निरंतर बनी रहती है ..

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राम शरणम्
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        बडे तालाब के समीप सात हज़ार वर्ग फीट में बना राम शरणम् का विशाल भवन झाबुआ जिले के साथ ही पूरे प्रदेश में आस्था का केंद्र बना हुआ है .. तल से ३ मंजिला राम शरणम् भवन की आकृति भक्तो और दर्शनाथ लोगो के लिए बेहत आकर्षक और दुर्लभ नज़ारा प्रतीत होता है ... चारो तरफ हरियाली से भरे द्रश्य और समीप ही विशाल तालाब को देख ऐसा आभास होता है जैसे राम शरणम् का यह विशाल भवन तालाब में अपना प्रतिबिम्ब निहार रहा हो.... निश्चित रूप से अनुपम छठा , दुर्लभ नज़ारा और हरियाली भरे द्रश्य राम शरणम् भवन के खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा सा दिखाई पड़ते है ...
         भवन के निर्माण में हजारो भक्तो ने अपना पसीना बहाया ...यही कारण है की बाज़ार मूल्य के हिसाब से करीब पोने दो करोड़ की लागत का मंदिर मात्र 90 लाख रुपये में बनकर तैयार हो गया भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल 33 हज़ार 250 वर्ग फीट है ,जिसमे पांच सो साधक एक साथ रहकर साधना कर सकते है ... भवन के लिए सात हज़ार फीट जमीन 12 लाख रुपये में खरीदी गयी यह जमीन पहले राजा की थी जिस पर हाथी बांधे जाते थे बाद में इसे पांच व्यवसायियों ने खरीद लिया .....संस्था के अलावा 17 हज़ार लोगो ने 90 लाख के राशी बिना मांगे भेट करी .....२६ जनवरी 2005 को भवन का भूमि पूजन किया गया ...करीब 13 महीनो की अवधि तक अनवरत कार्य चलने के पश्चात् 3 मार्च 2006 को राम शरणम् का उदघाटन समारोह रखा गया जिसमे पूरे देश के भक्तो ने अपनी मोजुदगी दर्ज कराई..


साईं मंदिर झाबुआ
      साईं मंदिर झाबुआ शहर के लिए एक बेहत धार्मिक और सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाला एक ऐसा स्थल जहा आने वाले समस्त भक्त अपनी सभी मनोकामनाए , पूर्ण होती हुई पाते है. इंदौर अहमदाबाद राष्ट्रिय राजमार्ग पर स्थित श्री शिरडी साई मंदिर समूचे शहर के लिए आस्था का एक बेहद विहंगम स्थल ,  मंदिर प्रांगन में चारो और हरियाली भरे द्रश्य संकेत है एक अद्भुत, एक चमत्कारिक और एक अत्यंत धार्मिक स्थल के।



इसके अलावा झाबुआ शहर के पास रंगपुरा में एक रामपंचायत मंदिर और एक जैन मंदिर है.
सम्बंधित लिंक :
  1. झाबुआ इतिहास 
  2. झाबुआ पर्व 

झाबुआ पर्यटन स्थल अपनी भाषा में पढ़े:


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आशा न्यूज़ चैनल की शुरुवात पर बधाई , कुछ समय पूर्व प्रकाशित एक अंक पड़ा था तीखे तेवर , निडर पत्रकारिता इस न्यूज़ चैनल की प्रथम प्राथमिकता है जो प्रकाशित उस अंक में मुझे प्रतीत हुआ , नई शुरुवात के लिए बधाई और शुभकामनाये.- कलावती भूरिया , जिला पंचायत अध्यक्ष

मुझे झाबुआ आये कुछ ही समय हुआ है , अभी पिछले सप्ताह ही एक शासकीय स्कूल में भारी अनियमितता की जानकारी मुझे आशा न्यूज़ द्वारा मिली थी तब सम्बंधित अधिकारी को निर्देशित कर पुरे मामले को संज्ञान में लेने का निर्देश दिया गया था समाचार पत्रो का कर्त्तव्य आशा न्यूज़ द्वारा भली भाति निर्वहन किया जा रहा है निश्चित है की भविष्य में यह आशा न्यूज़ जिले के लिए अहम कड़ी बनकर उभरेगा !!- डॉ अरुणा गुप्ता , पूर्व कलेक्टर झाबुआ

Congratulations on the beginning of Asha Newspaper .... Sharp frown, fearless Journalism first Priority of the Newspaper . The Entire Team Deserves Congratulations... & heartly Best Wishes- कृष्णा वेणी देसावतु , पूर्व एसपी झाबुआ

आशा न्यूज़ का ताजा प्रकाशित अंक मैंने दो तीन पहले ही पड़ा था आशा न्यूज़ पर प्रकाशित खबरों की सामग्री अद्भुत है , समाज के हर एक पहलु धर्म , अपराध , राजनीती जैसी हर श्रेणी की खबरों को इस समाचार पत्र में बखूबी प्रस्तुत किया गया है जो पाठको और समाज के हर वर्ग के लोगो के लिए नितांत आवश्यक है , समाचार पत्र की नयी शुरुवात लिए बधाई !!- रचना भदौरिया , एडिशनल एसपी झाबुआ

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